केश स्वास्थ्य एवं सप्तधातु विचार -आयुर्वेदीय दृष्टिकोण

- सुजाता ढोके 1, हितेश व्यास 2, महेश व्यास 3, अर्जुन सिंह बघेल 4, शुभांगी काम्बले 5

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ABSTRACT :

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में, शिरोरोग के शीर्षक के तहत बाल के गिरने को ‘खालित्य‘ कहा जाता है। यह धीरे-धीरे प्रगतिशील होने वाला विकार है। असम्यक जीवन शैली, तनाव, अस्वास्थ्यकर आहार सबं ध्ं ाी आदता,ंे कुपोषण, एनीमिया, हाइपोकैलसेमिया और कम एमिनो एसिड स्तर बाल के नुकसान में सीधे प्रतिबिंबित होते हैं। आयुर्वेदिक ग्रंथो में से आचार्य चरक ने त्रिमर्मीय अध्याय में खालित्य रोग एवं उसके चिकित्सा उपायों का वर्णन किया है। परन्तु खालित्य व्याधि और लक्षण दोनों स्वरूप होता है और उसकी संप्राप्ति समझने के लिए सप्त धात ु स्तर पर विचार करना आवश्यक है। इस शोधपत्र में सप्तधातु स्तर पर खालित्य व्याधि की उत्पत्ति को और साथ में धातु स्तर पर चिकित्सा को बताने का प्रयास किया गया है।

Keyword :खालित्य, रस धातु,रक्त धातु, मांस धातु, मेद धातु, अस्थि धातु, मज्जा धातु, शुक्र धातु।